कैसे आया था मेरा ट्रांसपोर्ट इकोनॉमी मैनेजमेंट की परिक्षा में सातवा रैंक।

मेरे उपर काम का दबाव था और मैं नौकरी करता था। पढ़ना चाहता था। लेकिन मेरे पास पैसे नहीं थे।
नौकरी के लिऐ कोई डिप्लोमा करना जरुर  था।
समस्या पैसे की थी।


वो दिन मेरे लिऐ दुखद था जब मेरा दोस्त फेल हो गया और मैं रिजल्ट देखे बीना घर आया।
नौकरी जरुरी थी।
क्योंकी उसके बिना मेरा जीवन यापन नहीं होता। उपर मां बाप का साया नहीं था।कुछ अपने ही मुझे ये भी ठप्पा लगा चुके थे की ये कुछ नहीं करेगा कामचोर है। ग्रेजुएट होकर भी मैं लेबर क्लास जॉब में था ये नई दिल्ली स्टेशन की बात थी। मैं एक रेलवे मालभाडा कम्पनी में मुंशी था ये नौकरी मेरे  किसी अजीज दोस्त के सहयोग से मिली थी।और मुझे कई बार कट्टे बोरियां सर पे लादनी पड़ती थी। मैं खुद को बदलना चाहता था। मैं अगर ट्रांसपोर्ट इकोनॉमी मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट होता तो सायाद बात बन जाती। मने कुछ करने की ठानी पैसा इक्कठा किया अपनी जरूरतें काटी ,जूते नहीं खरीदे कपड़े नहीं खरीदे। सर्द मौसम में एक दोस्त के साथ में इंस्टीट्यूट ऑफ रेल ट्रांसपोर्ट पहुंचा। फटे हाल था फीस का इंतजाम हो गया था। इंस्टीट्यूट का एड्रेस अखबार से लिया बहुत कम समय था।लेकिन  एडमिशन मिला खुश हुआ। मेरा दोस्त भी साथ था। लेकिन ये पढ़ाई मेरे विषयों से अलग थी सप्लाई चैन, मल्टी माड्यूल ट्रांसपोर्टेशन, कंप्यूटर कांसेप्ट, ई बिजनेस आदी कभी देखा पढ़ा न था। मेरे पास काम से फुरसत न थी। समय मिलता कपड़े धोने खाना बनाने साफ सफाई में चला जाता था।
तीन महीने पहले मुझे परीक्षा की
 तैयारी का समय मिला। मैंने लगातार मेहनत की लेकिन भरोसा नहीं था पास होऊंगा हो पाऊंगा, सायाद ही पास होने लायक नंबर  भी ले पाऊंगा। मुस्किल से पेपर देने का अवकास मिल पाया। आर्थिक साधन नहीं था नौकरी  की वजह से  दिन में मेहनत की रात को पढ़ता भी था।
लेकिन जब परिणाम आया।
(मेरा दोस्त फेल हो गया जो खूब पढ़ा था। और मैने डर के मारे परिणाम तक नहीं जाना।)

वि कास तंवर खेड़ी:true story)

फिर जिस दिन रिज़लट आया मेरे दोस्त के हाथ में अखबार था।ये वो दिन था जब मुझे झटका लगा मैने सुना था बहुत कम लोग इस डिप्लोमा कोर्स में पास हुए हैं। और मेरा दोस्त फेल हो गया है। मैं बीना रिज़लट देखे घर आ गया था।
करीब 15दिन बाद मुझे एक लेटर मिला जिसमें मेरा मुझे बधाई दी गई थी। कयोंकि मेरी सातवीं रैंक आई थीं। मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा था।
True story
एक सत्य घटना:विकास तंवर खेड़ी।

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